देश के इन रेलवे स्टेशनों के अनूठे नाम सुनते ही छूट जाएगी हंसी, शायद ही जानते होंगे आप इसके बारे में

अक्सर आपने लोगों के कई ऐसे नाम सुने होंगे जिनको सुनकर हंसी आने लगती हैं। हांलाकि किसी के नाम पर हंसना बहुत गलत बात हैं। लेकिन क्या आपने कभी ट्रेन के सफ़र के दौरान बीच में पड़ने वाले स्टेशन के नाम पर गौर किया हैं कि उनका नाम क्या हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे रेलवे स्टेशन के नाम बताने जा रहे हैं जिनका अनूठापन आपके चहरे पर हंसी ला देगा। तो आइये जानते हैं इन रेलवे स्टेशन के बारे में।

– राजस्थान में उत्तर-पश्चिम रेलवे के बीकानेर डिवीजन में एक स्टेशन आता है, जिसका नाम है बाप। हालांकि इस स्टेशन का कोड बीएएफ यानी बाफ है। इस स्टेशन पर एक ही प्लेटफॉर्म है और सिर्फ दो ट्रेनें ही यहां हाल्ट करती हैं।

– उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में आने वाले इस स्टेशन का नाम दिवाना है। यह स्टेशन हरियाणा में पानीपत के पास पड़ता है। दो प्लेटफॉर्म वाले इस स्टेशन पर हर रोज 16 ट्रेनें रुकती हैं।

– राजस्थान के पाली में स्थित इस स्टेशन का नाम रानी है। यहां अरावली एक्सप्रेस, हरिद्वार मेल, उत्तरांचल एक्सप्रेस, आश्रम एक्सप्रेस, अहमदाबाद-श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें रुकती हैं।

– उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर डिवीजन में स्थित इस स्टेशन का नाम साली है। यह काफी छोटा सा स्टेशन है, जहां महज दो प्लेटफॉर्म ही हैं। यहां रोजाना दो ट्रेनें रुकती हैं।

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– उत्तर-पश्चिम रेलवे के ही अजमेर डिवीजन (पाली) में स्थित गुडि़या रेलवे स्टेशन पर कोई प्लेटफॉर्म नहीं है। यहां हर रोज चार ट्रेनें हाल्ट करती हैं।

– दक्षिण-मध्य रेलवे में विजयवाड़ा डिवीजन में बीबीनगर नाम का एक रेलवे स्टेशन है। यह स्टेशन तेलंगाना में है।

One Thought to “देश के इन रेलवे स्टेशनों के अनूठे नाम सुनते ही छूट जाएगी हंसी, शायद ही जानते होंगे आप इसके बारे में”

  1. De telle sorte donc que, si les organes electriques provenaient par heredite de
    quelque ancetre recule, nous aurions pu nous attendre a ce que
    tous les poissons electriques fussent tout particulierement
    allies les uns aux autres; mais tel n’est certainement pas le cas.
    Antonino Mercuri
    Il parla ainsi et fit un signe avec ses sourcils, et Telemakhos, le cher fils du divin Odysseus, ceignit une epee aiguu, saisit
    une lance, et, arme de l’airain splendide,
    se placa aupres du siege d’Odysseus.

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