अपने पोते को गांधीजी ने ऐसे बताया था एक मिनट का मूल्‍य

आज इंदिरा गांधी का परिवार जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हैं उनका जिक्र ज्‍यादा होता है। मेरा मतलब है कि गांधी जी के असली परिवार से ज्‍यादा इनका जिक्र देश की राजनीति में ज्‍यादा होता है।

गांधी के असली बेटों और परिवार के बारे में कम ही चर्चा होती है और आज वो भारत से काफी दूर भी हो गए हैं।

आज हम आपको गांधी जी और उनके पोते से जुड़ा एक बेहद रोचक किस्‍सा बताने जा रहे हैं।

ये बात गांधी के आजादी के आंदोलन की है। भारत के सभी लोग गांधी जी के पीछे चलकर देश को आजादी दिलाने का सपना देख रहे थे। इस दौरान गांधी जी यूपी के दौरे पर गए। यहां रोज़ ही उन्‍हें रेल में यात्रा करनी पड़ती थी। उनका ज्‍यादातर समय रेल में ही बीतता था। गांधी जी हमेशा रेल के तीसरे दर्जे में बैठते थे।

गांधी जी

उस वक्‍त उनका पोता कांति भी उनके साथ था। तेजी से चलती हुई गाड़ी में गांधी जी अपने काम में व्‍यस्‍त थे और अपने साप्‍ताहिक पत्रों ‘यंग इंडिया’ और ‘नवजीवन’ के लिए लेखों में कांट-छांट कर रहे थे।

गांधी जी के आसपास हर तरफ उनकी पत्रिकाएं बिखरी हुई थीं। इन्‍हीं कागजों के नीचे गांधी जी की घड़ी भी दब गई थी। वक्‍त देखने के लिए जब गांधी जी ने अपनी घड़ी ढूंढनी शुरु की तो इस काम में उन्‍हें बहुत समय लग गया।

काफी ढूंढने के बाद भी उन्‍हें अपनी घडी नहीं मिली तो उन्‍होंने अपने पोते कांति से पूछा कि समय क्‍या हुआ है। कांति ने उत्तर दिया – बाबा, पांच बज गए हैं। तब गांधी जी ने कांति को बुलाकर उसकी घड़ी देखी तो उसमें अभी पांच बजने में एक मिनट बाकी था। इस पर गांधी जी ने नाराज़ होकर कांति से पूछा – ठीक से देखकर बताओ कि तुम्‍हारी घडी में कितना बजा है। तब कांति ने घडी में ध्‍यान से देखकर बताया कि अभी घडी में पांच बजने में एक मिनट शेष है।

इस पर गांधी बोले – लेकिन तुमने तो मुझे दूसरा समय बताया था। अगर तुम्‍हें समय का अनुामान ही लगाना था तो फिर घडी क्‍यों रखी। 30 करोड़ मिनटों को जोड़ो तो देखना कितने महीने, दिन और घंटे बनते हैं। अगर तुम सच बोल देते तो क्‍या बिगड़ जाता।

ये एक गलत आदत लत बन जाती है और फिर बाद में हमें ही नुकसान देती है। इसे सत्‍य की अवहेलना कहा जा सकता है। आगे से ऐसी लापरवाही मत करना।

इस तरह गांधी ने अपने पोते को एक मिनट का मूल्‍य बताया। दोस्‍तों, गांधी की इस कहानी से हमें भी सीख मिलती है कि समय की अवहेलना नहीं करनी चाहिए। समय सबसे ज्‍यादा बलवान होता है और ये कभी भी आपको ताकतवर बना सकता है या दुर्बल बनाकर छोड़ भी सकता है।

अगर आप भी अब तक समय का अनुमान ही लगाते आए हैं तो अब अपनी इस आदत को छोड़ दीजिए क्‍योंकि इससे नुकसान आपका ही है। आज आप समय की कद्र नहीं करेंगें तो कल समय आपकी कद्र नहीं करेगा। सत्‍य यही है कि हम सभी को समय की कद्र करनी चाहिए।

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