इन 5 खूंखार डाकू से थरथर कांपते थे सब !

खूंखार डाकू – भारत के मुख्य सरगना और मोस्टवांटेड की लिस्ट बहुत बड़ी है इन में नामी डाकू का भी समावेश होता हैं।

आतंकवादी अलगाववादी उग्रवादी के बारे में तो सब कोई जानते हैं लेकिन नई पीढ़ी को खूंखार डाकुओं के बारे में बहुत ज्यादा मालूमात नहीं है। इसलिए दोस्तों आज मैं देश के पांच सबसे खूंखार डाकू के बारे में बताने जा रहा हूं।

भारत के खूंखार डाकू  –

१ – डाकू मान सिंह

चंबल के डाकू के किस्से ज्यादा विख्यात है। सन 1940 से 1955 तक कुख्यात डकैत मान सिंह का कहर था। चंबल के सबसे बड़े डाकू में आज भी मान सिंह का नाम लिया जाता है। मान सिंह आगरा के राजपूत परिवार में जन्मे थे। चंबल के खेला राठौर नाम के गांव में रहते थे। यूं तो डकैत मान सिंह पर 1112 लुट और 125 हत्या के मामले दर्ज थे लेकिन वह ग़रीब और लाचार लोगों में काफी मशहूर थे। वह अमीर से पैसे चुराते और ग़रीबों में बांट देते थे मानसिंह के खौफ से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस ने 1955 में राज्य के भिंड जिले में एनकाउंटर कर दिया था।

खूंखार डाकू

२ – वीरप्पन 

18 वर्ष की उम्र में वीरप्पन शिकार करने वालों के गिरोहों में शामिल हो चुका था। वीरप्पन केरल तमिलनाडु के जंगलों में काफी समय तक छिपा रहा। कहां जाता है कि उसने तमिलनाडु कर्नाटक और केरल के जंगल में 900 से ज्यादा हाथियों को मार डाला, ऐसा भी कहा जाता है वीरप्पन के पास सैकड़ों डकैतों की फौज थी जिसके सहारे वह इतने लंबे समय तक भारतीय सेना से बचा रहा। वीरप्पन को पकड़ने के लिए सरकार ने 20 करोड़ रुपए खर्च किए 18 अक्टूबर 2004 वीरप्पन का एनकाउंटर कर दिया गया। पुलिस ने वीरप्पन के सिर में गोली मारी थी

खूंखार डाकू

३ – निर्भय सिंह गुज्जर 

निर्भय सिंह गुज्जर चंबल के आखरी बड़े डाकुओं में से एक था। निर्भय सिंह के ग्रुप में 70 से 75 डकैत थे जो एके-47 जैसी राइफलों से लैस थे नाइट विजन दूरबीन बुलेट प्रूफ जैकेट और मोबाइल फोन थे। इटावा के बिठौली थाना पहलवान क्षेत्र के निर्भय गुज्जर डेढ़ दशक तक लोगों पर राज किया। उसके पर हत्या रेप और अपहरण के कई सारे केस दर्ज थे। निर्भय के सिर पर 500000 का इनाम सरकार ने रखा था। निर्भय का आतंक 200 गांव में था। उसके खतरे से सरपंच विधायक और सांसद चुने जाते थे। 2005 में सरपंच चुनाव के दौरान कई सीटों पर अपने लोगों को चुनाव जितवाया था। 2005 में पुलिस की गोली द्वारा निर्भय सिंह की मौत हो गई।

खूंखार डाकू

४ – सुल्ताना डाकू 

सुल्ताना डाकू बीसवीं सदी का सबसे पहला और बहुचर्चित डाकू माना जाता है। सुल्ताना डाकू के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी तो उपलब्ध नहीं है लेकिन कुछ सूचनाओं में यह बताया गया है कि उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में नजीबाबाद में टूटा-फूटा किला है जिसे सुल्ताना डाकू का किला कहा जाता है। कुछ लेखकों का माना जाता है कि सुल्ताना डाकू का कहर 1924 में उत्तर प्रदेश रहा होगा। सुल्ताना डाकू गरीबों और मजदूरों के बीच काफी मशहूर था। उन्हें पश्चिमी मीडिया ने रॉबिनहुड का नाम दे रखा था। अमीरों से चीजें लूट कर गरीबों में बांट देते थे। इनको ब्रिटिश सरकार ने नजीबाबाद में फांसी देकर मार डाला था

खूंखार डाकू

५ – फूलन देवी 

किसी जमाने में दहशत का दूसरा नाम फूलन देवी था। कम उम्र में शादी फिर गैंगरेप और बाद में इंदिरा गांधी के कहने पर सरेंडर उन्होंने किया था। इसके बाद वह सबसे बहुचर्चित महिला रही थी। वह जातिगत भेदभाव का शिकार बनी थी। उन्होंने कई डकैती की थी। उन्होंने 1983 में सरेंडर किया था उसके बाद उन्हें 11 साल तक जेल में बिना मुकदमा मुकदमा चलाए रहना पड़ा।

खूंखार डाकू

ये है भारत के खूंखार डाकू – भारत के कई राज्यों में डाकू थे। डकैती, रेप, मर्डर जैसे गंभीर अपराध उनके सर पर थे। सरकार ने उन्हें पकड़ने के लिए लाखों का इनाम रखा था। डाकू की टोली में 5 से लेकर 100 तक सदस्य रहते थे। बड़े बड़े डाकुओ को पकड़ने के लिए कभी कभी सेना का भी सहयोग लेना पड़ा था। इस समय मे डाकू बीहड़ में नही रहते वो शहरों में पाए जाते हैं और दिनदहाड़े डाका डालते हैं लेकिन लोगो को लूंट का पता नही चलता।

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