तिरंगे से जुड़ी ये बातें हर भारतीय को जाननी चाहिए

आपने तिरंगा फिल्म का वो देशभक्ति गीत तो सुना ही होगा “मेरी जान तिरंगा है, मेरी शान तिरंगा है”। गीत का हर एक बोल देश की स्पष्ट रूपरेखा और हर एक देशवासी की सोच को बतलाता हैं। तिरंगे को भारत के सम्मान के रूप में देखा जाता है। इसलिए इसे भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में चिन्हित किया गया हैं। इसकी लाज बचाने के लिए कितने ही सैनिक शहीद हुए हैं। हममें से कई लोग तिरंगे को तो जानते हैं लेकिन शायद ही तिरंगे से जुडी ये बातें जानते होंगे जो आज हम आपको बताने जा रहे होंगे। एक भारतवासी होने के नाते तिरंगे से जुडी ये रोचक बातें हमें पता होनी चाहिए। तो आइये जानते हैं तिरंगे से जुडी कुछ रोचक बातें।

* क्या आपको पता है कि देश में ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ यानि भारतीय ध्वज संहिता नाम का एक कानून है, जिसमें तिरंगे को फहराने के कुछ नियम-कानून निर्धारित किए गए हैं। यदि कोई शख्स ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ के तहत गलत तरीके से तिरंगा फहराने का दोषी पाया जाता है तो उसे जेल भी हो सकती है। इसकी अवधि तीन साल तक बढ़ाई जा सकती है या जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों भी हो सकते हैं।

* तिरंगा हमेशा कॉटन, सिल्क या फिर खादी का ही होना चाहिए। प्लास्टिक का झंडा बनाने की मनाही है। किसी भी स्तिथि में फटे या क्षतिग्रस्त झंडे को नहीं फहराया जा सकता है। तिरंगे का निर्माण हमेशा रेक्टेंगल शेप में ही होगा। जिसका अनुपात 3 : 2 ही होना चाहिए।

* भारतीय तिरंगे के तीन रंग होते हैं केसरिया , सफेद और हरा रंग। केसरिया रंग शक्ति और साहस को दर्शाता है। सफेद रंग शान्ति , पवित्रता और सत्य का प्रतीक माना गया है। हरा रंग बुद्धि , भाईचारा और देश की हरियाली को दर्शाता है।

* तिरंगे के तीनों रंगों के बीच में एक चक्र होता है अशोक चक्र कहते हैं यो नीले रंग का होता है जिसमे 24 लकीरें होती हैं। इस चक्र का मतलब है के हमें कभी भी रुकना नहीं चाहिए जीवन गतिशील है।

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* हमारे झंडे को पिंगली वेंकैया ने डिजाईन किया था। सबसे पहले इसमें दो रंग थे लाल और हरा रंग बाद में इसमें सफेद रंग शामिल किया गया।

* आज़ादी से पहले झंडे के बीचो-बीच अशोक चक्र की जगह चरखा हुआ करता था परन्तु आज़ादी के बाद चरखे के स्थान पर अशोक चक्र का निशान छापा गया।

* देश के तिरंगे का इस्तेमाल किसी भी तरह की सजावट जा फिर वर्दी के लिए नहीं किया जा सकता है ।

* झंडे पर कुछ भी बनाना या लिखना गैरकानूनी है। किसी भी स्तिथि में झंडा (तिरंगा) जमीन पर सटना (टच) नहीं चाहिए। किसी भी गाड़ी के पीछे, बोट या प्लेन में तिरंगा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसका प्रयोग किसी ईमारत को ढकने में भी नहीं किया जा सकता है।

* जब झंडा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया जाए। इसे गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या पवित्र नदी में जल समाधि दे दी जाती है।

* किसी भी दूसरे झंडे को तिरंगा झंडे से ऊंचा या ऊपर नहीं लगा सकते और न ही बराबर रख सकते है। झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है।

* राष्ट्रपति भवन के म्यूज़ियम में एक छोटा तिरंगा रखा हुआ है, जिसे सोने के स्तंभ पर हीरे-जवाहरातों से जड़ कर बनाया गया है।

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