प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान सैनिकों को मुंह पर बांधना पड़ा था यूरिन से भीगा कपडा, जाने वजह

युद्ध एक ऐसा शब्द है जो बोलने में तो बहुत ही छोटा और आसान है लेकिन इसके परिणाम बहुत ही खतरनाक होते हैं। इस युद्ध के मंजार को देख पाना इतना आसान नहीं होता क्योंकि चारों ओर तबाही ही तबाही होती हैं। ऐसा ही कुछ दृश्य था प्रथम विश्वयुद्ध के समय का जिसके बारे में जानकर रूह काँप जाती हैं। इसी के साथ उस समय के सैनिकों के हालात भी सोचनीय थे। आज हम आपको प्रथम विश्वयुद्ध के समय के सैनिकों की ऐसी यी एक बात बताने जा रहे हैं जिसमें उन्हें यूरिन से भीगा कपडा अपने मुंह पर बांधना पड़ा था।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लगभग 30 अलग-अलग तरह की जहरीली गैस छोड़ी गयी थी। जिसकी चपेट में आकर ना सिर्फ आम जनता बल्कि हजारों सैनिक क्षतिग्रत और अपाहिज हो गए थे। इनमें से कई सैनिकों का पूरा जीवन युद्ध के बाद अस्पताल में ही बीता।

युद्ध के दौरान जहरीली गैस के कारण जब हालात बद से बदतर हो गए तब मैदान में डटे रहने के लिए आपातकालीन स्थिति में सैनिक अपने मुंह पर यूरीन से भीगा हुआ कपड़ा बांधते थे। ताकि जहरीली गैस की चपेट में आने से वो खुद को बचा सकें। हालांकि साल 1918 में सैनिकों के बीच गैस मास्क का वितरण किया गया था।

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