दुनिया के वो 5 क्रूर तानाशाह, जिनके बारे में जानकर आप हो जाएंगे हैरान

दुनिया के लिए अव्यवस्थित लोकतंत्र जितना खतरनाक है उससे भी ज्यादा खतरनाक तानाशाही विचारधारा है। लोकतंत्र में खामियों के कारण ही तानाशाह पैदा होते हैं। तानाशाही विचारधारा ने धरती को खून से लथपथ किया है। इतिहास के पन्नों में कई ऐसे तानाशाहों के नाम दर्ज हैं, जो किसी न किसी वजह से दुनियाभर में मशहूर थे। आज हम आपको कुछ ऐसे ही कुख्यात तानाशाहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी में कई अजीबोगरीब काम किए हैं।

ये हैं रोमन सम्राट कैलिग्यूला, जो इतिहास के पन्नों पर पहले तानाशाहों में गिने जाते हैं। कैलिग्यूला को रेस के घोडे़ बेहद पसंद थे। कहा जाता है कि उन्होंने अपने प्रिय घोड़े के लिए अलग से घर बनवाया था, जिसमें उसकी सेवा के लिए सैनिक तैनात थे। साथ ही उस घोडे़ को सोने के मर्तबान में शराब पिलवाई जाती थी। सिर्फ यही नहीं, कैलिग्यूला ने एक बार आदेश दिया था कि सभी नावों को नेपल्स की खाड़ी में एक कतार में खड़ी कर दी जाए, ताकि वो उन पर चल कर एक-एक शहर से दूसरे शहर जा सकें।

तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति नियाजोव भी बाकी के तानाशाहों से बिल्कुल भी कम नहीं थे। कहते हैं कि उन्हें खुद को सबसे अलग दिखाने का इतना शौक था कि उन्होंने अपने नाम पर शहर और पार्क बनवाए थे। सिर्फ यही नहीं, उन्होंने जनवरी महीने का नाम बदलकर उसे भी अपने नाम पर कर दिया था। कहा जाता है कि उन्होंने पुरुषों के लंबे बाल रखने को प्रतिबंधित कर दिया था।

हैती के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसवा डूवलियर भी ऐसे मामलों में कुछ कम नहीं थे। कहते हैं कि वो घोर अंधविश्वासी थे। उनका मानना था कि हर महीने की 22 तारीख को उनके अंदर आत्माओं की ताकत आ जाती थी, इसलिए वो हर महीने की 22 तारीख को ही अपने आवास से बाहर निकलते थे। उन्होंने दावा किया था कि उन्हीं की आत्माओं की शक्तियों की वजह से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या हुई थी।

ये हैं उत्तर कोरिया के तानाशाह रहे किम जोंग इल। कहते हैं कि किम जोंग इल के राज में उत्तर कोरिया के बाजारों में इंसानों का मांस भी बिकता था। वह सिनेमा का काफी शौकीन था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1978 में उसने दक्षिण कोरियाई डायरेक्टर शिन सांग ओक और उनकी पत्नी का अपहरण करा लिया था। उन्हें पांच साल तक कैद करके रखा गया। बाद में उन्हें इस शर्त पर छोड़ा गया कि वो उत्तर कोरियाई फिल्म इंडस्ट्री के विकास में मदद करेंगे।

सत्तर के दशक में युगांडा के शासक हुआ करते थे इदी आमीन। उन्हें अपने आप को सम्मानित करने का बहुत शौक था। ऐसा करके इदी आमीन ने पदकों का अंबार लगा दिया था। वो यह भी कहा करते थे कि राष्ट्रमंडल देशों का प्रमुख उन्हें होना चाहिए, न कि क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय को। कहते हैं कि वो अपने राजनीतिक विरोधियों के कटे सिर अपने फ्रिज में रखा करते थे। हालांकि इसकी कभी पुष्टि नहीं हो पाई।

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