वो 60 दिन, जब जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते रहे अमिताभ, शरीर में फैल गया था जहर

बता दें कि अमिताभ खुद कह चुके हैं कि वो 25% लिवर पर जिंदा हैं। उनका 75% लिवर काम करना बंद कर चुका है। दरअसल, फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान 22 सेकंड का एक सीन अमिताभ को जिंदगीभर का दर्द दे गया। 

इस वजह से सिर्फ 25% लिवर पर जिंदा हैं अमिताभ : 
फिल्म ‘कुली’ के सेट पर हुए एक हादसे के बाद अमिताभ ने 60 दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ी थी। अमिताभ के साथ ये हादसा 24 जुलाई, 1982 को बेंगलुरु में ‘कुली’ की शूटिंग के वक्त हुआ था। खबरों के मुताबिक, फिल्म के एक फाइट सीन में पुनीत इस्सर का घूंसा अमिताभ के मुंह पर लगना था, जिससे वे एक टेबल पर गिरते हैं। सीन के डुप्लिकेट बॉडी डबल के सहारे की बात भी की गई, लेकिन अमिताभ इसे खुद करने पर जोर दे रहे थे, ताकि सीन रियल लगे। सीन प्लान के मुताबिक शूट हुआ और पूरी तरह रियल लगा। सभी तालियां बजा रहे थे। अमिताभ भी मुस्कुराए, लेकिन तभी उनके पेट में हल्का दर्द शुरू हुआ। टेबल का एक कोना उनके पेट में बुरी तरह चुभ गया था।

लगा मामूली चोट है पर मामला गंभीर था : 
सभी को ये चोट मामूली लग रही थी, क्योंकि खून की एक बूंद भी नहीं निकली थी। अमिताभ होटल में आराम करने चले गए, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। अगले दिन यानी 25 जुलाई को यह दर्द कम होने की बजाय बढ़ गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। एक्स-रे हुआ, लेकिन डॉक्टर्स को कुछ समझ नहीं आया। बिग बी को नींद की गोली देकर सुला दिया गया। खबर मिलते ही मां तेजी, पत्नी जया और भाई अजिताभ बेंगलुरु पहुंचे। वे उन्हें वो उन्हें मुंबई ले जाना चाहते थे, लेकिन डॉक्टर्स ने इसकी इजाजत नहीं दी। तीसरे दिन यानी 26 जुलाई को अमिताभ की स्थिति और बिगड़ गई। तभी वेलोर के जाने-माने सर्जन एचएस भट्ट वहां आए हुए थे। यूनिट के कई बार आग्रह करने के बाद डॉ. भट्ट अमिताभ का केस स्टडी करने के लिए तैयार हुए। रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने कहा कि यदि दवाओं से आज अमिताभ की हालत नहीं सुधरी तो कल ऑपरेशन करना पड़ेगा।

पेट चीरने के बाद हैरान थे डॉक्टर : 
27 जुलाई, 1982 को डॉक्टर्स ने ऑपरेशन का फैसला लिया। उन्होंने पेट चीरकर देखा तो हैरान रह गए। अमिताभ के पेट की झिल्ली (जो पेट के अंगो को जोड़े रखती है और केमिकल्स से उन्हें बचाती है) फट चुकी थी। छोटी आंत भी फट गई थी। इस स्थिति में किसी भी इंसान का 3 से 4 घंटे जीवित रह पाना मुश्किल होता है। लेकिन अमिताभ 3 दिन तक इस कंडीशन से गुजरे। डॉक्टर्स ने पेट की सफाई की, आंत सिली। उस वक्त अमिताभ को पहले से ही कई बीमारियां (अस्थमा, पीलिया के कारण एक किडनी भी खराब हो चुकी थी, डायबिटीज) थीं। ऐसे में वो इतने दिन इस प्रॉब्लम से कैसे लड़े ये किसी आश्चर्य से कम नहीं था।

शरीर में फैल चुका था जहर, खून भी हो गया था पतला : 
28 जुलाई यानी ऑपरेशन के एक दिन बाद अमिताभ को निमोनिया भी हो गया था। उनके शरीर में जहर फैलता जा रहा था, खून पतला हो रहा था। ब्लड डेंसिटी को सुधारने के लिए बेंगलुरु में सेल्स मौजूद नहीं थे, जिन्हें मुंबई से मंगवाया गया। खून में सेल्स मिलाने के बाद अमिताभ की स्थिति 4 दिनों में पहली बार कुछ सुधरी थी, लेकिन अगले ही दिन फिर उनकी हालत खराब हो गई और उन्हें जैसे-तैसे उन्हें संभाला गया। 

अमिताभ को एयर एंबुलेंस से मुंबई लाया गया : 
मीटिंग कर डॉक्टर्स ने तय किया कि अमिताभ को मुंबई ले जाना ही सही होगा, वहां बेहतर इलाज की सुविधा थी। फाइनली, एयरबस के जरिए अमिताभ को मुंबई ले जाना तय हुआ। स्टेचर पर लेटे अमिताभ को क्रेन की मदद से एयरबस में शिफ्ट किया गया। रात 11 बजे बेंगलुरु से निकली एयरबस 31 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे मुंबई पहुंची। उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल पर स्पेशल विजिलेंस वॉर्ड में रखा गया। 

अमिताभ को चढ़ाया गया था 200 लोगों का खून : 
अमिताभ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी। डॉक्टर्स ने इसके लिए कृत्रिम नली लगाई। अगले कुछ दिनों तक अमिताभ की सेहत में कई उतार-चढ़ाव हुए। कभी उन्हें 101 डिग्री बुखार आया तो कभी आंतों पर पस पड़ गया। हर आम-खास व्यक्ति उन्हें खून देने के तैयार था। इन्हीं में से किसी हेपेटाइटिस बी से संक्रमित शख्स का खून गलती से अमिताभ को चढ़ा दिया गया। हालांकि कई दिनों तक चले इलाज और देशभर की दुआओं के असर से अमिताभ ठीक तो हो गए लेकिन उनका लिवर संक्रमित हो गया था। यही वजह है कि आज भी अमिताभ को लिवर की वजह से अक्सर रेग्युलर चेकअप के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। 

इस वजह से सिर्फ 25% लिवर पर जिंदा हैं अमिताभ : 
फिल्म ‘कुली’ के सेट पर हुए एक हादसे के बाद अमिताभ ने 60 दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ी थी। अमिताभ के साथ ये हादसा 24 जुलाई, 1982 को बेंगलुरु में ‘कुली’ की शूटिंग के वक्त हुआ था। खबरों के मुताबिक, फिल्म के एक फाइट सीन में पुनीत इस्सर का घूंसा अमिताभ के मुंह पर लगना था, जिससे वे एक टेबल पर गिरते हैं। सीन के डुप्लिकेट बॉडी डबल के सहारे की बात भी की गई, लेकिन अमिताभ इसे खुद करने पर जोर दे रहे थे, ताकि सीन रियल लगे। सीन प्लान के मुताबिक शूट हुआ और पूरी तरह रियल लगा। सभी तालियां बजा रहे थे। अमिताभ भी मुस्कुराए, लेकिन तभी उनके पेट में हल्का दर्द शुरू हुआ। टेबल का एक कोना उनके पेट में बुरी तरह चुभ गया था।

लगा मामूली चोट है पर मामला गंभीर था : 
सभी को ये चोट मामूली लग रही थी, क्योंकि खून की एक बूंद भी नहीं निकली थी। अमिताभ होटल में आराम करने चले गए, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। अगले दिन यानी 25 जुलाई को यह दर्द कम होने की बजाय बढ़ गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। एक्स-रे हुआ, लेकिन डॉक्टर्स को कुछ समझ नहीं आया। बिग बी को नींद की गोली देकर सुला दिया गया। खबर मिलते ही मां तेजी, पत्नी जया और भाई अजिताभ बेंगलुरु पहुंचे। वे उन्हें वो उन्हें मुंबई ले जाना चाहते थे, लेकिन डॉक्टर्स ने इसकी इजाजत नहीं दी। तीसरे दिन यानी 26 जुलाई को अमिताभ की स्थिति और बिगड़ गई। तभी वेलोर के जाने-माने सर्जन एचएस भट्ट वहां आए हुए थे। यूनिट के कई बार आग्रह करने के बाद डॉ. भट्ट अमिताभ का केस स्टडी करने के लिए तैयार हुए। रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने कहा कि यदि दवाओं से आज अमिताभ की हालत नहीं सुधरी तो कल ऑपरेशन करना पड़ेगा।

पेट चीरने के बाद हैरान थे डॉक्टर : 
27 जुलाई, 1982 को डॉक्टर्स ने ऑपरेशन का फैसला लिया। उन्होंने पेट चीरकर देखा तो हैरान रह गए। अमिताभ के पेट की झिल्ली (जो पेट के अंगो को जोड़े रखती है और केमिकल्स से उन्हें बचाती है) फट चुकी थी। छोटी आंत भी फट गई थी। इस स्थिति में किसी भी इंसान का 3 से 4 घंटे जीवित रह पाना मुश्किल होता है। लेकिन अमिताभ 3 दिन तक इस कंडीशन से गुजरे। डॉक्टर्स ने पेट की सफाई की, आंत सिली। उस वक्त अमिताभ को पहले से ही कई बीमारियां (अस्थमा, पीलिया के कारण एक किडनी भी खराब हो चुकी थी, डायबिटीज) थीं। ऐसे में वो इतने दिन इस प्रॉब्लम से कैसे लड़े ये किसी आश्चर्य से कम नहीं था।

शरीर में फैल चुका था जहर, खून भी हो गया था पतला : 
28 जुलाई यानी ऑपरेशन के एक दिन बाद अमिताभ को निमोनिया भी हो गया था। उनके शरीर में जहर फैलता जा रहा था, खून पतला हो रहा था। ब्लड डेंसिटी को सुधारने के लिए बेंगलुरु में सेल्स मौजूद नहीं थे, जिन्हें मुंबई से मंगवाया गया। खून में सेल्स मिलाने के बाद अमिताभ की स्थिति 4 दिनों में पहली बार कुछ सुधरी थी, लेकिन अगले ही दिन फिर उनकी हालत खराब हो गई और उन्हें जैसे-तैसे उन्हें संभाला गया। 

अमिताभ को एयर एंबुलेंस से मुंबई लाया गया : 
मीटिंग कर डॉक्टर्स ने तय किया कि अमिताभ को मुंबई ले जाना ही सही होगा, वहां बेहतर इलाज की सुविधा थी। फाइनली, एयरबस के जरिए अमिताभ को मुंबई ले जाना तय हुआ। स्टेचर पर लेटे अमिताभ को क्रेन की मदद से एयरबस में शिफ्ट किया गया। रात 11 बजे बेंगलुरु से निकली एयरबस 31 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे मुंबई पहुंची। उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल पर स्पेशल विजिलेंस वॉर्ड में रखा गया। 

अमिताभ को चढ़ाया गया था 200 लोगों का खून : 
अमिताभ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी। डॉक्टर्स ने इसके लिए कृत्रिम नली लगाई। अगले कुछ दिनों तक अमिताभ की सेहत में कई उतार-चढ़ाव हुए। कभी उन्हें 101 डिग्री बुखार आया तो कभी आंतों पर पस पड़ गया। हर आम-खास व्यक्ति उन्हें खून देने के तैयार था। इन्हीं में से किसी हेपेटाइटिस बी से संक्रमित शख्स का खून गलती से अमिताभ को चढ़ा दिया गया। हालांकि कई दिनों तक चले इलाज और देशभर की दुआओं के असर से अमिताभ ठीक तो हो गए लेकिन उनका लिवर संक्रमित हो गया था। यही वजह है कि आज भी अमिताभ को लिवर की वजह से अक्सर रेग्युलर चेकअप के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। 

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