6 घटिया बॉलीवुड फिल्में जो विदेशी फिल्मों की रीमेक हैं, जानिए

बॉलीवुड में हर तरह की फिल्में बनती हैं, ‘अच्छी’ और ‘बुरी’. कुछ बहुत अच्छी होती हैं और कुछ तो  ‘राम-राम’. हॉलीवुड का भी कुछ-कुछ यही हाल है. एक तरफ ‘टैक्सी ड्राईवर’ और ‘रेजिंग बुल’ जैसी महान फिल्में हैं और एक तरफ ‘ट्वाईलाईट’ और ‘जैक एंड जिल’ जैसी बेकार फिल्मों का चलन भी चला है.

बॉलीवुड प्रोड्यूसरों को अच्छी स्क्रिप्टें न जाने क्यों पसंद नहीं आतीं और अगर पसंद आ भी गयी तो उसे दर्शक पसंद नहीं करते. इस झमेले से बचने के लिए बहुत सारे निर्माता-निर्देशक विदेशों में बनी फिल्मों की हूबहू नक़ल कर एक ‘नई फिल्म’ का नाम देकर रिलीज़ कर देते हैं. यह ‘फैशन’ बॉलीवुड में सालों से चला आ रहा है.

यह सूची उन फिल्मों की है जिन्होंने अपनी मूलपात्र फिल्मों को निराश किया है.

१. उगली और पगली – माय सैसी गर्ल.

220px-Uglyaurpagli



उगली और पगली, माय सैसी गर्ल की बेहद खराब रीमेक थी. माय सैसी गर्ल एक कोरियाई फिल्म थी जिसका रीमेक हॉलीवुड भी बना चूका है. लेकिन हॉलीवुड रीमेक उगली और पगली से काफी बेहतर था.

मल्लिका शेरावत और रणवीर शोरे की बधिरतापूर्ण अदाकारी ने दर्शकों के सिर में दर्द पैदा कर दिया!

२. धूम – फ़ास्ट एंड फ्युरिअस – ओशंस ११.
 

DhoomPoster


‘धूम’ को आलोचकों से ना ही तेज़ मोटर-साइकिलें बचा सकीं और नाहीं अभिषेक बच्चन के लाल और काले चश्में. फ़ास्ट एंड फ्युरिअस और ओशंस ११ अपने आप में दो अलग-थलग फिल्में थीं लेकिन शानदार थीं. धूम ने दोनों फिल्मों की इस तरह से खिल्ली उड़ाई है कि पूछिए मत.

३. एक अजनबी – मैन ऑन फायर

ek 38h



अमिताभ बच्चन ने देंज़ेल वाशिंगटन का किरदार निभाया और फिल्म को भारत के दर्शकों ने नकार दिया और फिल्म फ्लॉप हो गयी. ‘एक अजनबी’ एक बहुत ही अच्छा उदाहरण है कि दूसरों की फिल्में चुराने के बाद कम-से-कम उन फिल्मों अच्छे से बनाना चाहिए.

४. द किलर – कोलेटरल

The-Killer


जब इरफ़ान खान और इमरान हाश्मी ने टॉम क्रूस और जेमी फॉक्स के किरदार निभाएं तब दर्शकों के और आलोचकों के मुह से गालिओं के नदियाँ बहने लगीं. फिल्म भी कुछ ख़ास नहीं थी. ऐसा प्रतीत होता है कि बिलकुल हूबहू नक्ल बनाने में लगे, फिल्म के निर्देशक, हसनैन हैदेराबाद्वाला ने अपना दिमाग कौड़ियों के दाम बेच दिया था.

५. दिल बोले हडीप्पा – शी’स द मैन

large_aoO3OtAojt9g8D60tro8s26mGmj



रानी मुख़र्जी दाढ़ी लगाके और कमीज़-पतलून पहने क्रिकेट का खेल खेलतीं हैं और यह ‘कोई भी’ समझ नहीं पता कि रानी मिखेर्जी एक लड़की है. कुछ और सुनना चाहेंगे आप?
मै शी’स द मैन के बारे में अच्छा बोलना सही नहीं मानूंगा क्योंकि इस फिल्म में भी यही सब कुछ दिखाया गया है.

६. गॉड तुस्सी ग्रेट हो – ब्रूस ऑलमाइटी

GTGH_albumcover



‘गॉड तुस्सी ग्रेट हो’ ने ‘ब्रूस ऑलमाइटी’ की धज्जियां उड़ा दीं. जिम कैरी का किरदार दबंग सलमान खान ने निभाया और मॉर्गन फ्रीमैन का किरदार बच्चन साहब ने निभाया. सलमान खान को अदाकारी नहीं आती और बच्चन साहब का फिल्म में मन नहीं लगा. कुल मिलाकर रीमेक घटिया थी और ओरिजिनल लाख गुना बेहतर.

एक बात कहने के लिए यह समय बिलकुल सही है कि अब तो बॉलीवुड को अपने होश संभाल लेने चाहिए और मूलपात्र फिल्में बनाना शुरू कर देनी चाहिए. रीमेक बनाएं तो बनाएं लेकिन फिल्म को अच्छा बनाएं और मूलपात्र यानी ओरिजिनल फिल्म के कॉपीराइट्स ज़रूर खरीदें. वरना ऐसी खराब फिल्मों का कारवां यूँ मुसलसल चलता ही रहेगा!

Leave a Comment